साँवरिया विरह गीत — जी भरता ही नहीं (लिरिक्स व व्याख्या)
साँवरिया के दर्शन की अतृप्त प्यास—यह विरह भजन कहता है कि देखकर भी जी नहीं भरता, फिर कहाँ जाए भक्त?
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